जब ता’लीम का वक़्त था, हम मोहब्बत में मसरूफ़ थे, दुनिया-दारी सीख न पाए, बस बहते ही रह गए, कोई मसला नहीं, क्यूंकि जब वक़्त आया, तो तुम्हींने दुनिया-दारी सीखा दी, काश मै अच्छा तालिब-इल्म ना होता, माद्दियत से बच कर अपनी रूहकी मा’सूमियत महफ़ूज़ रख पाता, मोहब्बत में मसरूफ़, अंटा-ग़फ़ील, मख़्मूर, बेवक़ूफ़, यही हमारी …
“ऐ तुझ्याकडे किती पैसे आहेत ?” चेतनने विचारले. मी पण लगेच उत्तर दिले, “५ रुपये का पिक्चरला जायच आहे का?” “अरे, मोठा हो, लहान आहेस का पिक्चर बघायला?” हाच काल म्हंटला होता पिक्चरला जाऊ बरेच दिवस झाले थिएटरला गेलो नाही जरा लक्ष्मीनारायणला जाऊ… आता एका दिवसात हा लहानाचा मोठा होईल मला कसे कळणार ! पण …
Two movies based on true events, two movies gunning for the Oscars, two movies with splendid actors, two movies on historical choices having great significance for today’s world, hence, I decided to watch the two movies on consecutive days! It is as if both movies were competing for the title of ‘shortest timeline’, The Post …