Posts in tag
जब ता’लीम का वक़्त था, हम मोहब्बत में मसरूफ़ थे, दुनिया-दारी सीख न पाए, बस बहते ही रह गए, कोई मसला नहीं, क्यूंकि जब वक़्त आया, तो तुम्हींने दुनिया-दारी सीखा दी, काश मै अच्छा तालिब-इल्म ना होता, माद्दियत से बच कर अपनी रूहकी मा’सूमियत महफ़ूज़ रख पाता, मोहब्बत में मसरूफ़, अंटा-ग़फ़ील, मख़्मूर, बेवक़ूफ़, यही हमारी …
When I first saw the movie ‘Guide,’ I was enthralled by the arc of Raju, his catharsis, and almost a Valmiki’an transformation. It made me wonder – Why isn’t this adapted into an Oscar-winning Hollywood movie! Well, some people did try, and let’s just say that some layouts look good on architectural paper, but, in …